Chetavni Bhajan

Hoi Javo Sant Sudharo

होई जावो संत सुधारो

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यहीं चलाएँ · Play here
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होई जावो संत सुधारो थारी काया जी अपने धणियों रा मारग झीणा है ओ रावळमाल समझयोड़ा वो तो झीणेड़े मारग चालो रथ घोड़ा ने धीमा हाको नी ओ रावळमाल ॥ टेक ॥ उंडा उंडा नीर अथंग जल भरिया जी तेकड़ा रो थाग नहीं आयो है ओ रावळमाल होई जावो संत सुधारो थारी काया जी ॥1॥ कड़वा रे नीम निबोल्यां ज्यां री मीठी जी कुण तर मिसरी मिलाई है ओ रावळमाल होई जावो संत सुधारो थारी काया जी ॥2॥ बैठ हथायां माला झूठ मत बोलो जी पथ पंचो रे माहि जावे है ओ रावळमाल होई जावो संत सुधारो थारी काया जी ॥3॥ घर री तो खोंड करकरी ओ लागे जी गुड़ तो चोरी रो मीठो लागे है ओ रावळमाल होई जावो संत सुधारो थारी काया जी ॥4॥ पराई नार आँयणिया में ऊभी जी ज्याँ ने बेनड़ कह बतला वो ओ रावळमाल होई जावो संत सुधारो थारी काया जी ॥5॥ उजड़ खेतों में माला बीज मत वावो जी हासल हाथ नहीं आवे है ओ रावळमाल होई जावो संत सुधारो थारी काया जी ॥6॥ दोस कर जोड़ राणी रूपां दे जी बोले जी अपने धणियों ने समझाया है ओ रावळमाल होई जावो संत सुधारो थारी काया जी ॥7॥

✍️ रचयिता: राणी रूपां दे

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