Chetavni Bhajan

Hari Ka Naam Sumar Sukhdham

हरि का नाम सुमर सुखधाम

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हरि का नाम सुमर सुखधाम जगत में जीवणा दो दिन का ॥ टेक ॥ पाप कपट कर माया जोड़ी गर्व करे धन का। सभी छोड़कर चला मुसाफिर वास हुआ बन का ॥1॥ सुन्दर काया देख लुभाया लाड करे तन का। छूटा श्वास बिखर गई देही ज्यों माला मनका ॥2॥ जोबन नारी लगे प्यारी मौज करे मन का। कालबली का लगे तमाचा भूल जाय ठणका ॥3॥ यह संसार स्वपन की माया मेला पल छिन का। ब्रह्मानंद भजन कर बंदे नाथ निरंजन का ॥4॥

✍️ रचयिता: ब्रह्मानंद

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