Chetavni Bhajan

Guru Vandana

गुरु कृपा से पूरण सारा काम होता है

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गुरु कृपा से पूरण सारा काम होता है गुरु चरण सेवा फल चारों धाम होता है ॥ टेक ॥ प्रहलाद को गुरु मिली थी भक्तिमति कुम्हारी भक्ति भाव जिगर में जाग्या ज्ञान पा गया भारी पिता पुत्र को मारण चाल्या कर में गहि कटारी भक्त बचावण काज प्रभु ने देह नृसिंह की धारी हिरणाकुश पाजी का शीश कलाम होता है ॥1॥ नारद से पा गया ज्ञान उत्तानपाद का जाया पाँच बरस की ऊमर में ईश्वर से हेत लगाया ऐसी करी अखण्ड तपस्या तीन लोक थर्राया अमर नाम कर दिया ध्रुव को आसमान चमकाया ऐसे नर का सहायक श्री घनश्याम होता है ॥2॥ तुलसीदास महात्मा होग्या गुरु बनी घर नारी पट खोल दिये मन मन्दिर के धर मारी ज्ञान दुधारी हिरदे हुआ उजाळा छूटी मोह माया की घ्यारी हुआ महा विद्वान कवीश्वर भक्ति लागी प्यारी धरा राम का ध्यान जगत में नाम होता है ॥3॥ गुरु ज्ञान का दीप जलाकर ज्योति नई जगादे अन्धकार अज्ञान हिये का सारा दूर भगादे मन मस्त हरामी हाथी पर अंकुश की चोट चलादे पड़ी हुई मंझधार नाव भवसागर पार तिरादे भंवर गुरु नारायण का गुलाम होता है ॥4॥

✍️ रचयिता: नारायण

इस भजन के बारे में

यह भजन गुरु की महिमा और उनकी कृपा के महत्व को समर्पित है। इसमें बताया गया है कि गुरु के चरणों की सेवा करना चारों धामों की यात्रा के समान पुण्यदायी है। गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं जो हमारे जीवन के सभी अधूरे कार्यों को पूर्ण करते हैं और हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं।

इस भजन में प्रहलाद, ध्रुव और तुलसीदास जैसे महान भक्तों के उदाहरण दिए गए हैं, जिन्होंने अपने गुरु के मार्गदर्शन से ही ईश्वर को प्राप्त किया। यह भजन हमें सिखाता है कि चाहे जीवन की परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, गुरु का आशीर्वाद हमें भवसागर से पार उतारने में सक्षम है।

भक्त इस भजन को गुरु पूर्णिमा, सत्संग या किसी भी शुभ अवसर पर गाते हैं। इसे गाने से मन में श्रद्धा और समर्पण का भाव जागृत होता है। यह भजन उन लोगों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायक है जो अपने मन रूपी चंचल हाथी पर नियंत्रण पाना चाहते हैं और जीवन में सच्ची शांति व ईश्वर की भक्ति की तलाश में हैं।

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