Guru Dev Bina Kaun Bandhave Dheer
गुरु देव बिना कौन बंधावे धीर
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गुरु देव बिना कौन बंधावे धीर, राम नाम का अमृत प्याला, पियो अमीरस नीर ॥ श्लोक ॥
गुरु देव बिना कौन बंधावे धीर ॥ टेक ॥
सतगुरु दाता बड़ा विधाता, शरणे पड़ियो शरीर
छलरिये संग छोड़ दियो है, पड़ियो समद में सीर ॥1॥
मात पिता और कुटुम्ब कबीलो, सब स्वार्थ का सीर
माया है कूड़ कपट की, तीन दिना रो सीर ॥2॥
भवसागर अति ऊंडो भरियो, अपारम पारा नीर
राम नाम की जहाज बनाले, उतरो पहली तीर ॥3॥
रामानंद मिल्या गुरु पूरा, हिरदे भलकिया हीर
कहत कबीर सुनो भाई साधो, चरण कमल को सीर ॥4॥
✍️ रचयिता: कबीर दास
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