Ghana Din So Riyo Re
घणा दिन सो रियो रे अब जाग मुसाफिर जाग
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घणा दिन सो रियो रे अब जाग मुसाफिर जाग ।
जाग सके तो जाग मुसाफिर जाग सके तो जाग,
घणा दिन सो रियो रे अब जाग मुसाफिर जाग ॥ टेक ॥
पहला सोयो मात गरभ में, उल्टे पांव पसारे ।
कौल वचन कर बाहर आयो, भूल गयो भगवान,
जनम थारो हो रियो रे अब जाग मुसाफिर जाग ॥1॥
दूजो सोयो मां की गोद में, हस हस दांत दिखाय ।
बेहन भुआ सब लाड लडावे, हो रयो मंगळाचार,
लाड थारो हो रियो रे अब जाग मुसाफिर जाग ॥2॥
तीजो सोयो तिरिया सेज में, गले में बांहें डाल ।
किया भोग सब रोग से दुखिया, तन हो गयो रे बेकार,
विवाहे थारो हो रियो रे अब जाग मुसाफिर जाग ॥3॥
चौथो सोयो जा शमशाने, लम्बे पांव पसार ।
कहत कबीर सुनो भाई साधो, दियो अगिन में डार,
मरन थारो हो रियो रे अब जाग मुसाफिर जाग ॥4॥
✍️ रचयिता: कबीर
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