Chetavni Bhajan

Geeta Ramayan Upanishad

गीता रामायण उपनिषद्

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गीता रामायण उपनिषद्, जिस घर में वेद पुराण नहीं। मुख में जिनके राम नाम ना, उस घर में भगवान नहीं॥ श्लोक बूढ़े माता पिता बिन सेवा, घर से निकाले जाते हो। घर की देवी ठुकराकर, घर नार पराई लाते हो। राखी बंधवा कर भी रक्षा बहन की ना कर पाते हो। भारत माँ की लुटे आबरू कायर बन छुप जाते हो॥1॥ बेटी का धन खाते हो, वो तो जिन्दा इंसान नहीं। भाई बहन का रिश्ता ना अब, मित्र नया रिवाज है। दिन रात मदहोश नशे, आवारा फिरते आज है। फैशन में फिरे बेटा-बेटी, पर मात-पिता को नाज है॥2॥ हाय हेलो मॉम डैड घर, अपनी ना आवाज है। ज्ञानी हो के ज्ञान ध्यान और ना कोई चिन्तन करता हो। शरीर जनेऊ डाल के भी मदिरा पी मांस खाता हो। वेद शास्त्र खुद ना पढ़े ना, औरों को पढ़ाता हो। कर्म काण्ड छोड़ कर सारे, खुद को ज्ञानी कहता हो। ना धर्म अपना निभाता हो, बिन धर्म यहाँ कल्याण नहीं॥3॥ भरत राम-लक्षण सा प्रेम ना, भाई-भाई को खाने लगे। अपने ग्रन्थ धरे कूड़े में, पश्चिम के गुण गाने लगे। सारे जग को ज्ञान दिया, उल्टा हमको समझाने लगे। हिन्दू संस्कार भूलकर, अपनी जड़ हिलाने लगे। पछी अशोक जगाने लगे बिन जागे हिन्दुस्तान नहीं॥4॥

✍️ रचयिता: अशोक

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