Chetavni Bhajan

Gayon Ki Raksha Karo

गायों की रक्षा करो

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यहीं चलाएँ · Play here
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कहाँ बैठा छुप के कान्हाँ अब कलयुग में कब आयेगा। तेरी गायों की दशा देख, तुझको भी रोना आयेगा ॥ टेक ॥ वैसे तो भारत वासी गायों को माता कहता है। आज उसी का मांस नोचकर बड़े चाव से खाता है। रोटी देना बात दूर की, चारा तक ना खिलाता है। भूखी प्यासी द्वार पे आये डण्डे मार भगाता है। जल्दी आ मुरलीवाले गऊ वंश खत्म हो जायेगा ॥1॥ गलियों में भूखी मरती चारे का कोई नाम नहीं। कागज पन्नी छिलके खाये, जिनमें इनकी शान नहीं। इनको कहते पशु आवारा चरने का स्थान नहीं। सोच रही है तेरी गाये, अपना तो भगवान नहीं। हमदर्द कोई इन्सान नहीं, जो दुख इनका मिटायेगा ॥2॥ रखता ना कोई गाय घर में कुत्ते पाले जाते है। गन्दा मैला गाये खाती, कुत्ते बिस्कुट खाते है। ठूस ठूस ट्रकों में गायें, कटने को पहुँचाते है। देख के हालत बछड़ों की, नयना आँसू भरलाते है। लौट के ना आयेगी फिर, कितनी तू बंशी बजायेगा ॥3॥ शास्त्र कहते गौ मूत्र तो सबसे बड़ी दवाई है। घर की शुद्धि गाय का गोबर, घी अमृत का भाई है। सुबह गऊ के दर्शन को दिन की शुरुआत बताई है। गऊ की सेवा किनती उत्तम ग्रन्थों में समझाई है। अशोक पंछी लिख सन्देशा, जन-जन तक पहुँचायेगा ॥4॥

✍️ रचयिता: अशोक पंछी

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