Chetavni Bhajan

Duniya Ke Logon Ki Kaisi Aadat

दुनिया के लोगों की कैसी आदत अब बन आई

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दुनिया के लोगों की कैसी आदत अब बन आई। औरों की थाली में घी अब देता घणा दिखाई ॥ टेक ॥ घर में पड़ा हो, कितना धन वो नजर नहीं आता है। खर्च करे ना अपना पैसा, औरों का खाता है। खुद को कहे कंगाल तिजोरी सदा छुपा रखता है। भीख मांगने आये कोई घर ओर का कहता है। अपना घर तो घर ना दिखे कहे झोपड़ी बनाई ॥1॥ अपने किये ना पछतावा बस दोष किसी को देते है। अपना गुनाह छिपाकर के वो और पे जड़ लेते है। अपने घर ही काम बहुत पर दूर कमाने जाते है। पैर पड़े दिखता ना दूर के ढोल सुनाने लगते है। अपनी शक्ल ना देख सके, गैरों की करे बुराई ॥2॥ घर की मुर्गी दाल बराबर किसे नही भाती है। औरों के घर कैसी भी हो सदा नजर जाती है। सुख से रोटी खाय पड़ोसी जलन उन्हें आती है। अपना पड़ोसी दुखी होय, उनके खुशियाँ छाती है। पास पड़ा किसकी ना नजर रहती हे नजर पराई ॥3॥ अपना-अपना बचा के रखलू, खालूँ और किसी का। मै ना सुखी रहूँ तो सुख ना देखू और किसीका। अपना-अपना सोचे आदमी ना देखे भला किसी का। पंछी अशोक यादव लिखता कहता गाँव चुरी का। चेला यादराम का घड़ता रोज नई कविताई ॥4॥

✍️ रचयिता: अशोक यादव

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