Chetavni Bhajan

Do Din Ka Hai Khel Jagat Mein

दो दिन का है खेल जगत में

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दो दिन का है खेल जगत में क्यों वर्षों का अरमान करे। इक पल का भी नहीं भरोसा, जोड़ जोड़ सामान धरे ॥ टेक ॥ किसके लिये रोज कमाये, किसके लिये महल बनाये। यहाँ ना कोई रूक पाये, मुसाफिर आये जाये। क्यों पाप का बोझ उठाये, हो - हो - हो - हो। क्यों पाप का बोझ उठाये, बोझा ले के सुबह-शाम फिरे ॥1॥ जग में तो अकेला आया, तब साथ और क्या लाया। सब कुछ तो यहां से पाया, जो भी पहना और खाया। ये ना तेरी धन माया, हो - हो - हो - हो। ये ना तेरी धन माया, जिसके कारण अभिमान करे ॥2॥ कुछ कर ले नेक कमाई, जिन्दगी मुश्किल से पाई। कर ले ईश्वर से सगाई, उसमें है तेरी भलाई। भक्ति की नौका बनाई, हो - हो - हो - हो। भक्ति की नौका बनाई, जो बैठे भव से पार करे ॥3॥ सबको तो पता है जाना, पर हर बनता अन्जाना। इक राम नाम संग होना, लिखे अशोक पंछी गाना। कोई ना संग आया, हो - हो - हो - हो। कोई ना संग आया और कोई भी ना साथ मरे ॥4॥

✍️ रचयिता: अशोक पंछी

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