Chetavni Bhajan

Daya Dharam Ka Mool Hai

दया धरम का मूल है

👁 7 views
यहीं चलाएँ · Play here
Text size:
दया धरम का मूल है, और पाप मूल अभिमान। तुलसी दया न छोड़ियो, जब तक घट में प्राण ॥ दोहा तेरे दया धरम नहीं मन में, तेरे दया धरम नहीं मन में। ओ दया धरम नहीं मन में, मुखड़ा क्या देखे दरपण में ॥ टेक ॥ कागज की एक नाव बनाई, छोड़ी गहरा जल में। धरमी धरमी पार उतर गया, धरमी धरमी पार उतर गया, पापी डूबे जल में, मुखड़ा क्या देखे दरपण में ॥1॥ पेंच बांधकर बांधे पगड़ी, तेल लगावे जुलफन में। इण ताळी पे बांस उगेला, इण ताळी पे बांस उगेला, ढोर चरेला वन में, मुखड़ा क्या देखे दरपण में ॥2॥ आम की डाळी कोयल राजी, सुआ राजी वन में। घरवाळी तो घर में राजी, घरवाळी तो घर में राजी, तपसी राजी वन में, मुखड़ा क्या देखे दरपण में ॥3॥ खोटी कर के माया जोड़ी, जोड़ धरी बरतन में। कहे कबीर सुणो भाई साधो, कहे कबीर सुणो भाई साधो, रवे मन की मन में, मुखड़ा क्या देखे दरपण में ॥4॥

✍️ रचयिता: कबीर

Related Bhajans