Chal Sakhi Satsang Mein Chala
चाल सखी सत्संग में चाला
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चाल सखी सत्संग में चाला, सत्संग में सतगुरु आसी।
हरि चरणों की हो जा दीवानी, नई तो जुगाड़ा में बह जासी ॥ टेक ॥
ब्रह्मा जी आसी, विष्णु भी आसी, शंकर आसी कैलासी।
छोटो सो गणपति आसी, माँ गोरा ने संग लासी ॥1॥
राम भी आसी, लछमण आसी, मधुवन का वनवासी।
हनुमान सा पायक आसी, माँ सीता संग में लासी ॥2॥
घड़ी-घड़ी में भरजे बराबर, पलक-पलक में जग जासी।
एक घड़ी सत्संगत कर ले, कट जासी लख चौरासी ॥3॥
गणेश आसी, रिद्धि-सिद्धि लासी, माँ गोरा ने संग लासी।
दशरथ जी के दो कँवर लाडले, वे तो वन के वनवासी ॥4॥
हरि की सेवा गुरु चरण में, बनत-बनत बीरा बन जासी।
मीठा राम सत्संगत शरणे, कर भजन नर तर जासी ॥5॥
✍️ रचयिता: मीठा राम
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