Chetavni Bhajan

Chahe Papi Milo Ji Hajar

चाहे पापी मिलो जी हजार

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यहीं चलाएँ · Play here
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चाहे पापी मिलो जी हजार, नुगरा मत मिलज्यो म्हने मत मिलज्यो रे भगवान, नुगरा मत मिलज्यो ॥ टेक ॥ सर्प के मुख में अंगुली दिज्यो जहर की पुड़िया घोल के पिज्यो मत नुगरा संग जीवन करज्यो, बीके माथे पाप को भार ॥1॥ मत देख्यो जी नुगरा का मुखड़ा भावे जितना दे दो दुखड़ा रबा न चाहे दे नहीं टंकड़ा बीके भीतर भरयौ रे विकार ॥2॥ मत करज्यो रे नुगरा संग मेला चाहे रिज्यो सदा ही अकेला बो ले डूबै रे मजधार ॥3॥ सुगरा नर सत्संग में आवे तन मन धन अर्पण कर जावे कहे कबीर विचार तिर जावे बो ले जावे भव पार ॥4॥

✍️ रचयिता: कबीर दास

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