Bujhat Syam Kaun Tu Gori
बूझत स्याम कौन तू गोरी
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इस भजन के बारे में
यह प्रसिद्ध पद महाकवि सूरदास जी द्वारा रचित है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पहली भेंट का बहुत ही सुंदर और चंचल वर्णन किया गया है। इस भजन में कृष्ण जी राधा रानी से उनका परिचय पूछते हैं और पूछते हैं कि वे यहाँ पहले कभी क्यों नहीं दिखीं। राधा रानी अपनी भोली-भाली बातों से उन्हें उत्तर देती हैं कि वे तो अपने घर में ही खेलती हैं और उन्होंने सुना है कि नंद का बेटा (कृष्ण) माखन और दही की चोरी करता फिरता है। अंत में, चतुर कृष्ण अपनी बातों से भोली राधा को साथ खेलने के लिए मना लेते हैं। यह संवाद बाल-लीला का एक अत्यंत मधुर और रसिक प्रसंग है।
भक्त इस भजन को मुख्य रूप से ब्रज की होली, झूलन उत्सव या राधा-कृष्ण के मिलन के प्रसंगों पर गाते हैं। इसे गाने का भाव प्रेम और बाल-सुलभ सरलता से जुड़ा है। इसे सुनने या गाने से मन में राधा-कृष्ण की मधुर छवि उभरती है और भक्त स्वयं को ब्रज की उस दिव्य लीला का हिस्सा महसूस करते हैं। यह भजन मन को आनंद और भक्ति के रस से सराबोर कर देता है, जिससे चित्त शांत और प्रसन्न रहता है।
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