Chetavni Bhajan

Bina Swarth Chale Na Duniya

बिना स्वार्थ चले ना दुनिया

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बिना स्वार्थ चले ना दुनिया, स्वार्थ भी जरूरी है। आशा तृष्णा लोभ मोह बिन जिन्दगी अधूरी है ॥ टेक ॥ स्वार्थ ना होगा तो कोई, पास किसी के ना आयेगा। सूने हो जाये मन्दिर भगवान अकेला पायेगा। दूध ना पिलाये माँ बच्चा भूखा रह जायेगा। बिना स्वार्थ कोई दुधेरू, लात गाय की खायेगा। दुख में लेता राम नाम ये, स्वार्थ की मजबूरी है ॥1॥ बिना स्वार्थ कोई भक्त ना मन्दिर में आ पाता है। एक रूपये का चढ़ा चढ़ावा, लाख मांग के जाता है। विषय तृष्णा नर नारी का बनता तो एक नाता है। अपना वंश बढ़ाने खातिर बेटा बेटी चाहता है। बिना लोभ के कोई ना करता, किसी की जी हजूरी है ॥2॥ बिना स्वार्थ रिश्ता ना माँ बाप बहन और भाई का। पति जाये परदेश न फिर देखो चलन लुगाई का। बिना स्वार्थ चले ना खंजर, बकरे पे कदे कसाई का। जग को छोड़ फ़कीर बना पर ओड़ रहा ना कमाई का। पापी पेट भरन की खातिर, हर एक करे मजदूरी है ॥3॥ ऐसा नहीं मिला मुझको जो बिना स्वार्थ काम करे। बिना स्वार्थ कोई भक्त ना उस मालिक का ध्यान धरे। बिना स्वार्थ कोई ना दाता अपने हाथों से दान करे। आशा तृष्णा लोभ मोह जीवन जीने का काम करे। अशोक पंछी लिखे नाम जो, गाँव बतावे चूरी है ॥4॥

✍️ रचयिता: अशोक पंछी

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