Bhartari Rajpat Na Chhod
भरतरी राजपाट न छोड़
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भरतरी राजपाट न छोड़ उठा लियो चिमटों हाथा।
चिमटों हाथा तोड़ दिया पिंगला स नाता ॥ टेक ॥
भजन सुणाऊं भरतरी का गाऊं मिटा गीत।
इन्द्र दादो पिता गंदफ भाई बिक्रमा दीत ॥1॥
बहणा मैणवत ओर भाई भोमसिंह यही ग्रंथ गाता।
इक दिन राजा भर्तृहरि ठा लिन्यो तीर कबाण ॥2॥
खेलण जाऊं शिकार राजा मन म दिन्यो ठाण।
जी दिन नाही मिली शिकार मिर्गला प तुरंत बाण बाता ॥3॥
खव मिर्गण्या सुण र राजन मत करज्ये अन्याय।
सोची समझी नाही भरतरी बाण मिर्ग पर ठाय ॥4॥
जी दिन आप श्राफ मिर्गण्या दिनी राजा थर-थर घबराता।
जगनाथ पुरा को वासी गुर्जर गाव बिरदीचन्द ॥5॥
उज्जैन नगरी त्याग्यो राजा मोह माया को फन्द।
कवी रामअवतार माली जोड़ गुर्जर बिरदी चन्द ॥6॥
गाता भरतरी राजपाट न छोड़ उठा लियो चिमटों हाथा ॥7॥
✍️ रचयिता: रामअवतार माली
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