Chetavni Bhajan

Bhai Se Badhkar Dushman Na

भाई से बढ़कर दुश्मन ना

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भाई से बढ़कर दुश्मन ना, भाई से बढ़कर यार नहीं। सारे रिश्ते एक तरफ पर, माँ जैसा दुलार नहीं ॥ टेक ॥ बुरे वक्त में साथ चले उसके जैसा परिवार नहीं। पतिव्रता के धर्म चले उस नार से बढ़कर नार नहीं। मौके ऊपर प्राण बचा दे, उस जैसा हथियार नहीं। साथ बैठकर धोखा दे दे, उस जैसा गद्दार नहीं। साथी छोड़े बीच भँवर, उसके जैसा मझधार नहीं ॥1॥ रोग दिखे ना मर्ज मिले, उसके जैसा बीमार नहीं। देर सही पर खुशियाँ दे दे, वैसा इन्तजार नहीं। आगे चल लड़े दुश्मन से, उस जैसा सरदार नहीं। खर्चा कर, बच जाये पैसा, वैसा रोज़गार नहीं। अपनी छोड़ गैर घर जाये, वो सच्चा भरतार नहीं ॥2॥ मेहमान चला जा खुश होकर उसके जैसा सत्कार नहीं। मनचाही वस्तु मिल जाये, उस जैसा बाज़ार नहीं। अटके काम कर दे पल में उस जैसा औज़ार नहीं। तूफानों में पार तार दे, उस जैसा पतवार नहीं। दो नावों पे करे सवारी, उसका जग में आधार नहीं ॥3॥ श्रोता जिसकों सुने चाव से, उस जैसा फनकार नहीं। सही समय मिले सही दवा, उसके जैसा उपचार नहीं। समझ जाये इक आँख इशारे, वैसा समझदार नहीं। हुनर हाथ पर काम मिले ना, उस जैसा बेकार नहीं। अशोक पंछी कही रागनी, जिसमे कोई सार नहीं ॥4॥

✍️ रचयिता: अशोक पंछी

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