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अलग-अलग सूरत सबकी
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अलग-अलग सूरत सबकी और अलग-अलग गुण के इन्सान।
रहे तुम्हारे आस-पास ही, कर लेना उनकी पहचान ॥ दोहा ॥
सबकी हाँ में हाँ मिलावे, शक्ल से भोले होते है।
कड़वी वाणी मुँह पर बोले, सच्चे मन के होते है।
बार-बार बाँहे फड़कावे, लड़ने वाले होते है।
आँख से आँख मिला न सके वो, डरने वाले होते है।
शक्ल पे किसके लिखा मिले ना ये सच्चा है ये शैतान ॥ टेक ॥
आलसी सीधा ना बैठे, दिन में भी वे सोते है।
अपनी ही धुन एकान्त में खोये, कवि लेखक होते है।
मन मे सदा रहे गुन गुनाते, भजनी गायक होते है।
दिल के कच्चे भावुक होते, जो बात-बात में रोते है।
दोनो तरफ की बात करे, धोखा देने में रहे महान ॥1॥
जार वही जो राह चलते, आँखे मटकाते रहते है।
चुगल खोर घर-घर घूमें, बातें छुप-छुप के सुनते है।
बेईमान जो बैठ सभा में ऊँगली लगाया करते है।
मनचले घर आस पास नित चक्कर मारा करते है।
जो अपनी ही करे बढ़ाई, घमण्डी के है, ये निशान ॥2॥
बात कड़ी मुँह पे सच्चाई, अच्छे माणस होते है।
औरों के दुख आँसू बहे, हमदर्द बड़े वो होते है।
सत्संग भाव भजन में रहे, वे बड़े धार्मिक होते है।
एक आवाज और लग जा साथ, वो यार सच्चे होते है ॥3॥
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