Hanuman Janm — Kesari Nandan, Pawanputra

हनुमान जन्म — केसरी नंदन, पवनपुत्र

Hanuman Janm — Kesari Nandan, Pawanputra

पवनदेव द्वारा पहुँचाए गए उस दिव्य प्रसाद और भगवान शंकर के वरदान से अंजनी का जीवन धन्य हो उठा। समय आने पर उनके गर्भ में एक दिव्य तेज का संचार हुआ। वन के पशु-पक्षी, वृक्ष-लताएँ, नदियाँ और पर्वत — सभी मानो किसी महान आत्मा के आगमन की प्रतीक्षा में प्रफुल्लित हो उठे। सारी सृष्टि में एक अलौकिक शांति और आनंद की लहर फैल गई।

चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा, मंगलवार का शुभ दिन था। उस पावन तिथि पर, प्रातःकाल की मंगल बेला में अंजनी की गोद में एक तेजस्वी शिशु ने जन्म लिया। उस शिशु का मुखमंडल सूर्य के समान देदीप्यमान था, शरीर वज्र के समान दृढ़ था और नेत्रों में असीम करुणा झलकती थी। जन्म लेते ही समस्त दिशाएँ प्रकाश से भर उठीं और आकाश से देवताओं ने पुष्पवर्षा की।

चूँकि यह शिशु वानरराज केसरी की धर्मपत्नी अंजनी की कोख से जन्मा था, इसलिए वह "केसरी नंदन" कहलाया। और चूँकि इसके जन्म में पवनदेव की दिव्य कृपा और सहभागिता थी, इसलिए यह "पवनपुत्र" अथवा "पवननंदन" के नाम से भी विख्यात हुआ। पिता केसरी का हृदय पुत्र को देखकर गर्व और आनंद से भर उठा, और माता अंजनी की आँखों से हर्ष के आँसू बहने लगे — उनकी वर्षों की तपस्या आज साकार हो उठी थी।

नन्हा शिशु अत्यंत चंचल और तेजस्वी था। जन्म के कुछ ही समय बाद उसमें ऐसा अद्भुत बल प्रकट होने लगा जो किसी सामान्य शिशु में संभव न था। वह पर्वत की चोटियों पर कूद जाता, बड़े-बड़े वृक्षों को झुला देता और अपनी क्रीड़ाओं से सारे वन को चकित कर देता। ऋषि-मुनि और वनवासी सभी उस बालक की दिव्यता देखकर आश्चर्यचकित रह जाते।

माता अंजनी अपने पुत्र को गोद में लेकर भगवान शंकर का स्मरण करतीं और सोचतीं कि महादेव का वरदान कितना अटल है। यह बालक साधारण नहीं, अपितु स्वयं रुद्र का अवतार था, जो आगे चलकर भगवान श्रीराम का परम भक्त बनकर संसार में भक्ति, बल और सेवा का अनुपम आदर्श स्थापित करेगा।

हनुमान जी का जन्म केवल एक शिशु का आगमन न था, अपितु धर्म, भक्ति और शक्ति के एक युग का शुभारंभ था। केसरी नंदन, पवनपुत्र, अंजनी के लाल — इन नामों में ही उनकी महिमा का पूरा सार समाया हुआ है।

उनका यह पावन जन्म हमें यह भाव देता है कि जहाँ भक्ति, तप और दिव्य कृपा मिलती है, वहीं संसार को धारण करने वाली महान शक्ति का प्रादुर्भाव होता है।

🔗 Open Link / Video →

Related Stories

Anjani Ki Tapasya Aur Putra Prapti Ka Vardan

अंजनी की तपस्या और पुत्र प्राप्ति का वरदान

Hanuman Janm va Balyakal
Yagya Ka Prasad Aur Pawandev Dwara Anjani Tak Pahunchana

यज्ञ का प्रसाद और पवनदेव द्वारा अंजनी तक पहुँचाना

Hanuman Janm va Balyakal
Surya Ko Phal Samajhkar Nigalna

सूर्य को फल समझकर निगलना

Hanuman Janm va Balyakal
Indra Ka Vajra Prahar Aur 'Hanuman' Naam Padna

इंद्र का वज्र प्रहार और 'हनुमान' नाम पड़ना (टूटी हनु)

Hanuman Janm va Balyakal
Pawandev Ka Krodh — Vayu Rok Dena Aur Devtaon Ka Vardan

पवनदेव का क्रोध — वायु रोक देना और देवताओं का वरदान

Hanuman Janm va Balyakal
Rishiyon Ka Shrap — Apni Shakti Bhool Jana

ऋषियों का श्राप — अपनी शक्ति भूल जाना

Hanuman Janm va Balyakal