Ram

Umrao Thari Boli

उमराव थारी बोली

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उमराव थारी बोली प्यारी लागे जी बना, उमराव जी ओ बनड़ा ॥ टेक ॥ शीश कलंगी पागड़ी, रतन जड़ित सिर पेच। कानन में मोती सोहे, मनमोहन थारौ भेष। जी रघुनाथ थारी चितवन प्यारी लागे जी बना, उमराव जी ओ बनड़ा ॥1॥ कण्ठे हीरां को सोहे, गल मोतियन की माल। बींटी मेहंदी कंगनौ, शोभा बनी रसाल। जी सियवर थारो लटको प्यारी लागे जी बना, उमराव जी ओ बनड़ा ॥2॥ अचकन झिलमिल कर रही, दे रही अजब बहार। दुपटों सोहे जरी को, मन मोहै रघुनाथ। जी दशरथ सुत थारी चाल प्यारी लागे जी बना, उमराव जी ओ बनड़ा ॥3॥ सीताजी की शोभा घणी, म्हांसू कही न जाय। प्रकट भई भूमध्य सूं, श्री मुख दियो दिखाय। जी केसरिया थारी जोड़ी प्यारी लागे जी बना, उमराव जी ओ बनड़ा ॥4॥

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