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Prabhu Ji Tum Chandan Hum Paani (Anup Jalota)

प्रभु जी तुम चन्दन हम पानी

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प्रभु जी, तुम चन्दन हम पानी। जाकी अंग-अंग बास समानी॥ प्रभु जी, तुम घन बन हम मोरा। जैसे चितवत चन्द चकोरा॥ प्रभु जी, तुम दीपक हम बाती। जाकी जोति बरै दिन राती॥ प्रभु जी, तुम मोती हम धागा। जैसे सोनहिं मिलत सुहागा॥ प्रभु जी, तुम स्वामी हम दासा। ऐसी भक्ति करै रैदासा॥

इस भजन के बारे में

यह प्रसिद्ध भजन संत शिरोमणि रविदास जी द्वारा रचित है। इसमें भक्त और भगवान के अटूट और पवित्र संबंध को दर्शाया गया है। रविदास जी कहते हैं कि जैसे चंदन के संपर्क में आने से पानी में उसकी सुगंध घुल जाती है, वैसे ही प्रभु की भक्ति में लीन होकर भक्त का जीवन भी सुगंधित हो जाता है। यह भजन ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और उनकी कृपा की महत्ता को सरल उदाहरणों जैसे दीपक-बाती, मोती-धागा और बादल-मोर के माध्यम से समझाता है।

संत रविदास जी इस भजन के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि भक्त का अस्तित्व भगवान के बिना अधूरा है। जब हम स्वयं को पूरी तरह ईश्वर को समर्पित कर देते हैं, तो हमारे भीतर का अहंकार मिट जाता है और हम प्रभु के रंग में रंग जाते हैं। यह भजन मन को शांति और एकाग्रता प्रदान करता है।

भक्त इसे विशेष रूप से ध्यान, प्रार्थना या सत्संग के समय गाते हैं। इसे गाने से मन में विनम्रता आती है और ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत होता है। यह भजन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति वही है जिसमें भक्त का अपना कोई स्वार्थ न हो, बल्कि वह केवल प्रभु की सेवा में ही अपना आनंद ढूँढे।

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