Khatu Shyam

Shyam Nimantran

श्याम निमन्त्रण

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ॐ सिद्ध श्री शुभ ओपमा थांने पांवा धोक प्रमाण जी। समाचार एक बंचज्यो थांसे बहुत जरूरी काम जी। म्हारा खाटू ओ म्हारे नीले वाला श्याम ॥ टेक ॥ घणां मान लिख्या आज थारो उत्सव एक मणाणो है। थोड़ो लिख्या घणों समझोगा, थांने निश्चय आणो है, म्हारा खाटू ओ म्हारे नीले वाला श्याम ॥1॥ थरो साथ है घणों खुशी थारा नितकी मंगल गावै है। और हाल सब ठीक ठाक, पण थारी याद सतावै है, म्हारा खाटू ओ म्हारे नीले वाला श्याम ॥2॥ सेवक थांका घणां उणमणा थां बिन भोत उदास जी। जीमो हो तो चलूं करोला, आकर म्हारे पास जी, म्हारा खाटू ओ म्हारे नीले वाला श्याम ॥3॥ भूल चूक सब मांफ करो म्हाने बेगा दर्शन दिज्यो। दास बिहारी के नेणां में हरदम बैठ्या रिझ्यो, म्हारा खाटू ओ म्हारे नीले वाला श्याम ॥4॥

✍️ रचयिता: बिहारी

इस भजन के बारे में

यह भजन खाटू श्याम जी को समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण निमंत्रण है। इसमें भक्त अपने आराध्य को एक प्रिय मित्र और स्वामी के रूप में याद करते हुए उन्हें अपने उत्सव में आने का आग्रह कर रहा है। भजन का भाव यह है कि भक्त के जीवन में सब कुछ ठीक होते हुए भी श्याम बाबा की कमी खलती है। भक्त अपनी व्याकुलता व्यक्त करते हुए कहता है कि बाबा के बिना उसका मन उदास है और वह चाहता है कि प्रभु स्वयं आकर उसके जीवन के उत्सव को सफल बनाएं। यह रचना खाटू श्याम जी के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण को दर्शाती है।

भक्त इस भजन को विशेष रूप से कीर्तन, जागरण या घर में किसी मांगलिक कार्य के आयोजन के समय गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य प्रभु को अपने हृदय के भावों से जोड़ना और उन्हें अपने जीवन में आमंत्रित करना है। जब भक्त का मन प्रभु के वियोग में उदास हो या वह अपने जीवन में ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव करना चाहता हो, तब यह भजन बहुत शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है। इसे गाने से मन में प्रभु के प्रति विश्वास बढ़ता है और भक्त को यह अनुभव होता है कि उसके बुलाने पर श्याम बाबा अवश्य आएंगे।

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