Khatu Shyam

Shyam Daras

श्याम दरश

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श्याम दरश मैंने पाया है, अनमोल खजाना पाया है बाबा की मूरत में देखो तीनों लोक समाया है श्याम....हो मेरे श्याम बाबा... ॥टेक॥ बाबा की मूरत कितनी सुहानी है, देखूँ जब इसको आती याद पुरानी है। बहना की इसने लाज बचायी, नरसी की इसने आन बचायी हर पल-पल हर क्षण में इसने हाथ बँटाया है... ॥1॥ गज के संकट की जब कठिन घड़ी आयी, निर्मल दिल से उसने ईश्वर की टेर लगायी। नंगे पैरों वो दौड़े थे आये, अपने भक्त की जान बचाने। ग्राह को मार गिराया और गज की जान बचाई है... ॥2॥ बाबा के दर्शन जब भी मैं पाता हूँ, जीवन के संकट सारे भूल जाता हूँ। नृसिंह मण्डल बाबा तेरे गुण गाये, 'मनोज' तुझको दिल से पुकारे। आन मेरी श्याम तुझको ही बचानी है.... ॥3॥

✍️ रचयिता: मनोज

इस भजन के बारे में

यह भजन खाटू श्याम बाबा के प्रति भक्त के अटूट प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। इसका भाव यह है कि श्याम बाबा के दर्शन करना किसी अनमोल खजाने को पाने जैसा है, क्योंकि उनकी दिव्य मूरत में ही तीनों लोकों का वास है। भक्त इस भजन के माध्यम से बाबा को याद करता है कि कैसे उन्होंने नरसी भक्त की लाज बचाई और द्रौपदी की रक्षा की। यह भजन हमें सिखाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से बाबा को पुकारता है, वे गजराज की तरह उसके हर संकट को दूर करने के लिए दौड़े चले आते हैं।

भक्त इस भजन को विशेष रूप से तब गाते हैं जब वे जीवन की कठिनाइयों से घिरे होते हैं और बाबा से सुरक्षा की प्रार्थना करना चाहते हैं। इसे गाने से मन को असीम शांति मिलती है और विश्वास दृढ़ होता है कि श्याम बाबा हर पल हमारे साथ हैं। यह भजन कीर्तन, सत्संग या घर पर एकांत में गाकर बाबा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक सुंदर माध्यम है। इसे गाते समय मन में यह भाव रखना चाहिए कि बाबा हमारी रक्षा के लिए सदैव तत्पर हैं, जिससे जीवन के सभी दुख और चिंताएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।

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