Khatu Shyam

Shyam Baba Kripa Karo

श्याम बाबा कृपा करो

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श्याम बाबा श्याम-बाबा कृपा करो, इस दास पर, इस दास पर। श्याम प्यारे, दास पुकारे, भक्तों की नैया बाबा तेरे सहारे ॥ टेक ॥ मोह-माया के जाल में ऐसे जकड़े हैं जकड़े हैं। काम, क्रोध, मद, लोभ के पाए पकड़े हैं। कैसे निकले बाहर रास्ता भूल गए, भूल गए। फन्दों ही फन्दों में हम तो झूल गए ॥1॥ हम गलती पर गलती भगवान करते हैं करते हैं। लेकिन फिर भी प्रेम तुम्हीं से करते हैं। ज्ञान-दीप पर अंधियारों के डेरे हैं डेरे हैं। काले-काले बादल हमको घेरे हैं ॥2॥ तेरी दया से तेरी ज्योति जगाई है-जगाई है। पूर्व जन्म की पूंजी सामने आई है। ऐसा वर दे श्याम तेरे गुण गाएं हम गाएं हम। भक्त पुकारे मंजिल श्री चरणों की पाएं हम ॥3॥

इस भजन के बारे में

यह भजन खाटू श्याम बाबा को समर्पित है, जो कलियुग के साक्षात अवतार माने जाते हैं। इस भजन का मुख्य भाव एक भक्त की पुकार है, जो संसार की मोह-माया और काम-क्रोध जैसे विकारों में फंसा हुआ है। भक्त बाबा से प्रार्थना करता है कि वह उसे इस भवसागर से बाहर निकालें और अपनी कृपा का हाथ उसके सिर पर रखें। यह भजन हमें याद दिलाता है कि भले ही हम अनजाने में गलतियाँ करते हैं, लेकिन प्रभु के प्रति हमारा प्रेम ही हमें उनके चरणों तक ले जाने का एकमात्र मार्ग है। भक्त अपनी अज्ञानता के अंधकार को मिटाने के लिए बाबा की ज्योति की शरण मांगता है। भक्त इसे तब गाते हैं जब वे जीवन में हताश महसूस करते हैं या जब उन्हें बाबा के प्रति अटूट विश्वास और मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। इसे गाने से मन को शांति मिलती है और हृदय में प्रभु के प्रति समर्पण का भाव जागृत होता है। यह भजन विशेष रूप से खाटू श्याम जी के भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है, जो अपनी नैया को बाबा के सहारे छोड़कर निश्चिंत हो जाते हैं।

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