Shankar Jatadhari Parvati Laage Pyari
शंकर जटाधारी, पार्वती लागे प्यारी
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इस भजन के बारे में
यह सुंदर भजन भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य स्वरूप का गुणगान करता है। इस भजन में एक बहुत ही सरल और मधुर तुलना की गई है, जहाँ एक ओर भगवान कृष्ण और राधा की लीलाओं का वर्णन है, तो दूसरी ओर भोलेनाथ के वैरागी और निराले स्वभाव को दिखाया गया है। जहाँ कृष्ण माखन-मिश्री का भोग लगाते हैं, वहीं हमारे भोले बाबा भांग का आनंद लेते हैं। यह भजन हमें याद दिलाता है कि ईश्वर के अलग-अलग रूप और उनकी जीवनशैली भले ही भिन्न हों, लेकिन वे सभी भक्तों के हृदय में प्रेम और भक्ति का संचार करते हैं।
भक्त इस भजन को विशेष रूप से शिवरात्रि, सावन के सोमवार या किसी भी शिव उत्सव के दौरान गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करना और उनके सरल, सौम्य और कल्याणकारी स्वरूप का ध्यान करना है। इस भजन को सुनने या गाने से मन में शांति आती है और भक्त स्वयं को कैलाशपति की भक्ति में लीन महसूस करते हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर का स्वरूप चाहे कैसा भी हो, उनकी भक्ति ही जीवन का सबसे बड़ा आधार है।
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