Shiv

Nilkanth Pe Baithya Bhola

नीलकंठ पै बैठ्या भोला सबकी चाल पिछाणे सै

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नीलकंठ पै बैठ्या भोला सबकी चाल पिछाणे सै किसनै के के चाहिए वो तो सबके मन की जाणे सै ॥ टेक ॥ भाँग नशे म्ह मस्त रहै और करता इच्छा पूरी अपणे भक्तों से भोला ना कदे बणावै दूरी उनको भव से पार उतारै, जिनकी नीत ठिकाणे सै ॥1॥ पच धूणे म्ह तपया करै और गल सरपां की माला सै सबका करता भला हमेशा ना भीतर म्ह काला सै अपणे दिल कै पास रखै ना, समझै कदे बिराणे सै ॥2॥ नरेंद्र सिंह सुण सासरोलिया जै लौ भोले म्ह लावैगा होज्या बेड़ा पार तेरा जै, ओम शिव ओम शिव गावैगा धर देगा तेरे सिर पै हाथ, यो भोला खड़ा सिरहाणे सै ॥3॥

✍️ रचयिता: नरेंद्र सिंह

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