Agad Bam Mahadev Lahari
अगड़ बम महादेव लहरी
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अगड़ बम महादेव लहरी, अगड़ बम महादेव लहरी।
जटा मुकुट में गंगा विराजे, बंशी बाजे गहरी ॥ टेक ॥
भस्मासुर ने करी तपस्या, नित माला फेरी।
भस्म कडो दीनो शिव शंकर, जद बणग्या बैरी ॥1॥
राम ने लक्ष्मण जी दूनूं, राग बीड़ छेड़ी।
नांदिये असवारी बाबो, तीन लोक हेरी ॥2॥
राम ने लक्ष्मण जी दूनूं, सीता ने हेरी।
हनुमान सा पायक उनके, लंका ने जारी ॥3॥
अगड़ बम्ब बाघम्बर बाबो, रूण्ड माल पेरी।
भर प्याला पारवतां देवे, नशा किया गहरी ॥4॥
तीन लोक और चौदह भवन में, है माया तेरी।
खेमदास वैरागी बोले, लाज राख मेरी ॥5॥
✍️ रचयिता: खेमदास वैरागी
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