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Ram Naam Ke Heere Moti

राम नाम के हीरे मोती

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राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराऊँ गली गली। ले लो रे कोई राम का प्यारा, शोर मचाऊँ गली गली॥ टेक ॥ धन दौलत और माल खजाना, ये तो है मिट्टी का ढेला। राम नाम अनमोल रतन है, कर लो रे कोई राम से मेला॥1॥ माया मोह के जाल में फँसकर, क्यों भटक रहा है प्राणी। राम नाम की ज्योति जलाकर, कर ले अपनी अमर कहानी॥2॥ संतों की वाणी सुन प्यारे, राम नाम का कर ले सुमिरन। भवसागर से पार उतर जा, छोड़ दे जग का ये बंधन॥3॥ कहत 'कबीर' सुनो भाई साधो, राम नाम है सच्चा साथी। अंत समय में काम आएगा, जब छूट जाएगी ये काया॥4॥

✍️ रचयिता: कबीर

इस भजन के बारे में

यह भजन संत कबीर दास जी द्वारा रचित है, जिसमें उन्होंने राम नाम को संसार का सबसे अनमोल रत्न बताया है। इसका भावार्थ यह है कि दुनिया की धन-दौलत और भौतिक सुख-सुविधाएं मिट्टी के ढेले के समान नश्वर हैं, जबकि प्रभु का नाम ही एकमात्र शाश्वत सत्य है। कबीर जी गली-गली में राम नाम का प्रसार कर रहे हैं ताकि भक्त माया के जाल से मुक्त होकर अपनी आत्मा का कल्याण कर सकें। यह भजन हमें याद दिलाता है कि अंत समय में केवल ईश्वर का नाम ही हमारा सच्चा साथी होता है। भक्त इसे विशेष रूप से सत्संग, कीर्तन या एकांत में प्रभु का स्मरण करते समय गाते हैं। इसे गाने से मन में वैराग्य और शांति का अनुभव होता है। यह भजन हमें सिखाता है कि सांसारिक बंधनों को छोड़कर राम नाम की ज्योति जलाना ही जीवन का असली उद्देश्य है, जिससे मनुष्य भवसागर से पार उतर सकता है।

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