Mharo Helo Sambhalo Ji
म्हारो हेलो साम्भळो जी
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जद जद भार बढ्यो धरती पर, हरि लियो अवतार।
पापी दुष्टां ने मारीया, निकलंक नेजा धार।। दोहा
हेलो म्हारो साम्भळो, रूणीचे रा नाथ।
हुकम होवे तो धणिया, आय जोड़ू हाथ।
म्हारो हेलो, वारि ए म्हारी अरजी,
हाँ हाँ म्हारी सायळ, साम्भळो जियो, जियो, जियो।। ॥ टेक ॥
देसूरी रो वाणियो, यात्रा ने जाय।
सामी मिळियो चोरटो, वो झूठी सौगन खाय।
म्हारो हेलो साम्भळो रूणीचे रा नाथ।। ॥1॥
डीगी-डीगी झाड़ियाँ ने, मधुरा बोले मोर।
तीन तो है यात री ने, चौथौ मिळगो चोर।।
म्हारो हेलो साम्भळो रूणीचे रा नाथ।। ॥2॥
गेरी गेरी झाड़ियाँ में, विरंगा बोले मोर।
मार दीनो वाणियाँ ने, धन ले गयो चोर।।
म्हारो हेलो साम्भळो रूणीचे रा नाथ।। ॥3॥
रामा सामा आवजो, कळजुग वेत करोड़।
अर्ज करूं अजमाल रा, म्हारो हेलो सुणजो जरूर।। दोहा
ऊभी ऊभी अबळा करे है पुकार।
कठीने गयो रे म्हारो, लीले रो असवार।।
म्हारो हेलो साम्भळो रूणीचे रा नाथ।। ॥4॥
अबळा री अरदास सुणी, आया रामापीर।
पिछम धरा रा राजवी, बाई सुगणां रा वीर।। श्लोक
✍️ रचयिता: लोक भजन
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