Shiv

Mhara Triloki Ka Nath

म्हारा त्रिलोकी का नाथ

👁 9 views
यहीं चलाएँ · Play here
Text size:
देवा का महादेव नाथ थारी लीला सबसे न्यारी। घणी प्यारी लागे थाने नांद्या की असवारी। भांग धतूरा खाकर पल में हरल्यो विपदा सारी। भगवान सहाय स डर हमेशा बैरी और बीमारी ॥ दोहा ॥ म्हारा त्रिलोकी का नाथ दीनबंधु दीनानाथ। मेल दयो भोला भगता का माथा माले हाथ ॥ टेक ॥ करता सभी देवता आदर थे हाथी की ओढ़ो चादर। बैठ्या काल अंधेरी रात, बैठ्या काल अंधेरी रात, मेल दयो भोला भगता का माथा माले हाथ ॥1॥ थाके मस्तक सोहवे चंदा, दुख का कट जावे सब फंदा। करदयो अमृत की बरसात, करदयो अमृत की बरसात, मेल दयो भोला भगता का माथा माले हाथ ॥2॥ हरदम बहे जटा में गंग, बैठी पार्वती जी संग। जिंद भूत हमेशा साथ, जिंद भूत हमेशा साथ, मेल दयो भोला भगता का माथा माले हाथ ॥3॥ सूरज चंदा अग्नि नेत्र, सुन्दर जयसिंह जी को जैपर। सारी दुनिया में विख्यात, जयपुर दुनिया में विख्यात, मेल दयो भोला भगता का माथा माले हाथ ॥4॥ सुणो भगवान सहाय की बात, गाणा भजन लिखूं दिन रात। नगरा माने नहीं कज्यात, नगरा माने नहीं कज्यात, मेल दयो भोला भगता का माथा माले हाथ ॥5॥

✍️ रचयिता: भगवान सहाय

इस भजन के बारे में

यह भजन भगवान शिव की महिमा और उनकी करुणा को समर्पित है। इसमें भक्त अपने आराध्य 'त्रिलोकीनाथ' से प्रार्थना करता है कि वे अपना आशीर्वाद रूपी हाथ उसके सिर पर रखें। भाव यह है कि महादेव, जो भांग-धतूरा ग्रहण करके भी भक्तों के सभी कष्टों को पल भर में हर लेते हैं, वे ही दीन-दुखियों के सच्चे रक्षक हैं। भजन में शिवजी के स्वरूप, जैसे मस्तक पर चंद्रमा, जटाओं में गंगा और माता पार्वती के साथ उनके दिव्य मिलन का सुंदर वर्णन किया गया है।

भक्त इस भजन को विशेष रूप से सोमवार के दिन या शिवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य मन की शांति और महादेव की कृपा प्राप्त करना है। जब जीवन में विपत्तियाँ आती हैं या मन अशांत होता है, तब भक्त इस भजन के माध्यम से भोलेनाथ को पुकारते हैं ताकि वे अपने भक्तों के दुखों के बंधन को काट सकें। यह भजन हमें याद दिलाता है कि जो महादेव काल के भी काल हैं, वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

Related Bhajans