Mhara Triloki Ka Nath
म्हारा त्रिलोकी का नाथ
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✍️ रचयिता: भगवान सहाय
इस भजन के बारे में
यह भजन भगवान शिव की महिमा और उनकी करुणा को समर्पित है। इसमें भक्त अपने आराध्य 'त्रिलोकीनाथ' से प्रार्थना करता है कि वे अपना आशीर्वाद रूपी हाथ उसके सिर पर रखें। भाव यह है कि महादेव, जो भांग-धतूरा ग्रहण करके भी भक्तों के सभी कष्टों को पल भर में हर लेते हैं, वे ही दीन-दुखियों के सच्चे रक्षक हैं। भजन में शिवजी के स्वरूप, जैसे मस्तक पर चंद्रमा, जटाओं में गंगा और माता पार्वती के साथ उनके दिव्य मिलन का सुंदर वर्णन किया गया है।
भक्त इस भजन को विशेष रूप से सोमवार के दिन या शिवरात्रि जैसे पावन अवसरों पर गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य मन की शांति और महादेव की कृपा प्राप्त करना है। जब जीवन में विपत्तियाँ आती हैं या मन अशांत होता है, तब भक्त इस भजन के माध्यम से भोलेनाथ को पुकारते हैं ताकि वे अपने भक्तों के दुखों के बंधन को काट सकें। यह भजन हमें याद दिलाता है कि जो महादेव काल के भी काल हैं, वे अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
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