Khatu Shyam

Lelyo Shyam Ji Ro Naam

लेल्यो श्याम जी रो नाम

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आशा की ज्योति जलाओ मन में उर में होगा उजाला। आशा थी एक श्याम से देखो विष का अमृत बना डाला ॥ दोहा लेल्यो र लेल्यो, लेल्यो र साथीड़ा रे। लेल्यो म्हारा श्याम जी रो नाम ॥ टेक ॥ म्हे व्यापारी श्याम नाम का, श्याम बसे जहँ तहँ धाम का। प्रेम नगर से म्हे सब आया, श्याम नाम का सौदा ल्याया। मोल है इनको अनमोल.... साथीड़ा र... ॥1॥ बाट तराजू कुछ नहीं ल्याया, मोल तोल को जोड़ न पाया। करल्यो सौदा संत संगत का, बेड़ा पार लगेगा भगत का। टोटे का नहीं काम.... साथीड़ा र... ॥2॥ सस्ता माल नफा है भारी, नृसिंह मण्डल के जुम्मे सारी। नाम हरि अनमोल रतन है, कहे 'मनोज' यह महँगा धन है। भजल्यो राधेश्याम.... साथीड़ा र... ॥3॥

✍️ रचयिता: मनोज

इस भजन के बारे में

यह भजन खाटू श्याम जी की महिमा और उनके नाम के स्मरण का महत्व बताता है। इसका भावार्थ यह है कि संसार में सबसे कीमती वस्तु प्रभु का नाम है। जिस प्रकार एक व्यापारी अपना व्यापार करता है, उसी प्रकार भक्त को श्याम नाम का व्यापार करना चाहिए। यहाँ 'सौदा' प्रेम और भक्ति का है, जिसमें कोई तराजू या मोल-तोल नहीं चलता, बस हृदय की सच्ची लगन चाहिए। यह भजन हमें सिखाता है कि संत-संगति में रहकर प्रभु का नाम जपने से जीवन की नैया पार हो जाती है और मन का सारा अंधकार मिट जाता है।

यह भजन भगवान श्री श्याम (कृष्ण) को समर्पित है, जो अपने भक्तों की हर विपत्ति को अमृत में बदल देते हैं। भक्त इसे विशेष रूप से सत्संग, कीर्तन या एकांत में मन की शांति के लिए गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य मन में आशा की ज्योति जलाना और प्रभु के प्रति अटूट विश्वास पैदा करना है। इस भजन को गाने से भक्त को मानसिक शांति मिलती है और उसे यह बोध होता है कि श्याम नाम ही वह अनमोल धन है जो जीवन के हर कष्ट को दूर कर सकता है।

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