Ram

Laga Lo Maat Seene Se

लगा लो मात सीने से

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लगा लो मात सीने से, बरस चौदह को जाते हैं तुम्हारी लाडली सीता, साथ लक्ष्मण भी जाते हैं ॥ टेक ॥ रोती हैं मात कौशल्या, नीर आँखों से बहता है राजा दशरथ भी रोते हैं, आज मेरे प्राण जाते हैं ॥1॥ धन्य हैं कैकेयी मैया, उन्होंने हमें वन को भेजा है न हाथी है न घोड़ा है, वहाँ पैदल ही जाना है ॥2॥ ये भोजन क्यों बनाये हैं, मात कैकेयी को जा देना लिखा नहीं किस्मत में भोजन, राम माँ को समझाते हैं ॥3॥ रो रही अयोध्या की प्रजा, नीर आँखों से बहता है चले हैं वन खड़ को श्री राम, सबके दिल घबराते हैं ॥4॥

✍️ रचयिता: अज्ञात

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