Khelau Jai Syam Sang Radha
खेलौ जाइ स्याम संग राधा
Loading…
इस भजन के बारे में
यह सुंदर भजन महाकवि सूरदास जी द्वारा रचित है, जिसमें राधा और कृष्ण के दिव्य बाल-लीला के प्रेम का वर्णन किया गया है। इस भजन का भावार्थ यह है कि राधा रानी श्री कृष्ण के साथ खेलने के लिए अत्यंत उत्साहित हैं, जिससे उनके मन की सारी बाधाएं मिट गई हैं। जब वे दोनों साथ खेलते हैं, तो उनकी शोभा इतनी अद्भुत होती है कि स्वयं ब्रह्मा जी भी उन्हें देखकर भ्रमित हो जाते हैं कि क्या वे प्रकृति के सौंदर्य को देख रहे हैं या साक्षात ईश्वर को। यह दृश्य इतना अलौकिक है कि इसे देखकर भक्त का मन आनंद और भक्ति से भर जाता है।
यह भजन मुख्य रूप से राधा-कृष्ण के मधुर मिलन और उनकी बाल-सुलभ क्रीड़ाओं को समर्पित है। भक्त इसे विशेष रूप से जन्माष्टमी, राधाष्टमी या किसी भी उत्सव के अवसर पर गाते हैं। इसे गाने का उद्देश्य मन में प्रेम और सात्विक भाव जगाना है। जब भक्त इस भजन को गाते हैं, तो वे स्वयं को वृंदावन की उन गलियों में महसूस करते हैं जहाँ राधा-कृष्ण का प्रेम सदा जीवंत है। यह भजन मन को शांति प्रदान करता है और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना को गहरा करता है।
क्या ठीक नहीं है? चुनें — admin जल्दी सुधार देगा।