Shiv

Bhole Hain Mere Baba

भोले हैं मेरे बाबा

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भोले हैं मेरे बाबा, मुँह माँगा वर देते हैं। निज भक्तों की नैया, पल भर में पार करते हैं ॥ टेक ॥ सिर पे है गंगा, गले नागों की माला, मुण्डमालाधारी, शिव हैं त्रिपुरारी। माथे पे है चन्दा, भस्म रमाये हैं ॥1॥ पाँवों में घुँघरू, कानों में बाली, बाघम्बरधारी महिमा तेरी न्यारी। हाथ में कमण्डल सोहे, त्रिशूल वो धारी हैं ॥2॥ संग में जग जननी नान्दी असवारी, 'मनोज' तेरी भोले निरखे छवि प्यारी। नृसिंह मण्डल को बाबा, पार लगाना है ॥3॥

✍️ रचयिता: मनोज

इस भजन के बारे में

यह भजन भगवान शिव की अपार करुणा और उनकी सरल प्रकृति का गुणगान करता है। इसका भावार्थ यह है कि महादेव अत्यंत भोले हैं और अपने भक्तों की सच्ची पुकार सुनकर उन्हें मनचाहा वरदान देते हैं। वे अपने शरणागत भक्तों के जीवन की नैया को बिना किसी देरी के भवसागर से पार लगा देते हैं। इस भजन में शिवजी के दिव्य स्वरूप का वर्णन है, जहाँ वे गंगा, चंद्रमा, त्रिशूल और नागों को धारण किए हुए अत्यंत सौम्य और कल्याणकारी दिखाई देते हैं। भक्त उनके इस निराले रूप की स्तुति करते हुए उनसे अपनी रक्षा और मार्गदर्शन की प्रार्थना करते हैं। भक्त इस भजन को विशेष रूप से सोमवार के दिन, महाशिवरात्रि या शिव मंदिरों में गाते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य मन की शांति और महादेव की कृपा प्राप्त करना है। जब भक्त का मन व्याकुल हो या वह जीवन में किसी कठिन परिस्थिति से गुजर रहा हो, तब इस भजन को गाने से हृदय में अटूट विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि यदि हम सच्चे मन से शिवजी की शरण में जाएँ, तो वे हमारी सभी बाधाओं को पल भर में दूर कर देते हैं।

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