Khatu Shyam

Bhajan Shyam Ki Yaad

बाबा तेरे भक्त को तेरी, याद है बहुत सताये

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बाबा तेरे भक्त को तेरी, याद है बहुत सताये। तुमसे बिछड़ कर जिन्दा हूँ, पर रहा न मोसे जाये ॥ टेक ॥ भूल गये क्या श्याम हमें तुम, याद करो पल वो भी। क्या था रिश्ता तेरा-मेरा, और एक वक्त है ये भी। खाटू वाले तुझ बिन मैंने, क्या-क्या कष्ट उठाये ॥1॥ इस दिन की खातिर क्या मैंने, मुझसे प्रीत लगायी। मैंने तेरे प्यार की खातिर, हर एक बात निभायी। मैं हूँ तेरे प्यार में पागल, तू क्यूं आँख चुराये ॥2॥ याद तेरी जब जब आती है, चुप चुप के रोता हूँ। भूख लगे ना प्यास लगे ना, ना कभी सोता हूँ। हाल मेरा बेहाल हुआ है, दुनियां हँसी उड़ाये ॥3॥ गलती अगर हुयी है मुझसे, माफ मुझे तुम करना। मैं हूँ तेरा तू है मेरा, वादा हमें है करना। माफी 'प्रभु' ने माँगली तुझसे, अब क्यों उसे रुलाये ॥4॥

✍️ रचयिता: प्रभु

इस भजन के बारे में

यह भजन खाटू श्याम जी के प्रति एक भक्त की गहरी तड़प और प्रेम को समर्पित है। इसमें भक्त अपने आराध्य बाबा श्याम से अपनी विरह की व्यथा साझा कर रहा है। भावार्थ यह है कि भक्त अपने प्रभु से दूर होकर बहुत दुखी है और उसे हर पल बाबा की याद सताती है। वह प्रभु से पूछता है कि क्या वे उसे भूल गए हैं, क्योंकि उसके जीवन का हर कष्ट केवल बाबा के प्रेम के बिना ही है। यह भजन एक सच्चे प्रेमी की व्याकुलता को दर्शाता है जो अपने प्रभु के दर्शन के लिए छटपटा रहा है।

यह भजन मुख्य रूप से खाटू श्याम जी के भक्तों द्वारा गाया जाता है। जब भक्त का मन उदास हो या उसे प्रभु की कमी महसूस हो, तब वह इस भजन के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करता है। इसे गाने का उद्देश्य प्रभु से अपनी गलतियों की क्षमा मांगना और उनके साथ अपने अटूट संबंध को फिर से याद करना है। भक्त इसे गाकर अपने मन का बोझ हल्का करता है और यह विश्वास जगाता है कि अंत में बाबा अपने भक्त को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे और उसे अपना लेंगे।

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