Khatu Shyam

Bhajan Melo Babe Ko

भजन मेलो बाबे को

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यहीं चलाएँ · Play here
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बाबे को साथीड़ा आपां खाटू चालां ॥ टेक ॥ रंग बिरंगी तरह-तरह की, ध्वजा हाथ में लेल्यो रे गाता और बजता चालां, श्याम रिझा ल्या रे ॥1॥ चंग बजता होली गाता, हेलो मिलकर देस्या रे श्याम धणी के चरणों में मिल, शीश नवा ल्या रे ॥2॥ फागुण माहीं मेलो भारी, सब घरकां न लेल्यो रे श्याम कुण्ड में नहाकर जीवन सफल बणा ल्या रे ॥3॥ बाबा की असवारी निकले, सब कोई दर्शन पा ल्यो रे ग्यारस की रात श्याम की, ज्योत जगा ल्या रे ॥4॥ बाबाजी की करां बंदगी, आशीष पा ल्यो रे हर साल मन्दिर के आगे, घूमर घालां रे ॥5॥

इस भजन के बारे में

यह भजन खाटू श्याम जी के प्रसिद्ध फाल्गुन मेले के उत्साह और भक्ति को समर्पित है। इसका भावार्थ यह है कि भक्त अपने साथियों के साथ मिलकर बाबा श्याम के दरबार खाटू जाने की तैयारी कर रहे हैं। वे हाथों में रंग-बिरंगी ध्वजाएं लेकर, गाते-बजाते और श्याम धणी का गुणगान करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। भक्त फाल्गुन के मेले में श्याम कुंड में स्नान कर अपने जीवन को धन्य बनाना चाहते हैं और बाबा की अलौकिक सवारी के दर्शन कर ग्यारस की रात को ज्योत जलाकर अपनी श्रद्धा अर्पित करना चाहते हैं।

यह भजन मुख्य रूप से कलयुग के अवतारी देव 'खाटू श्याम जी' की महिमा का गान करता है। फाल्गुन महीने में जब खाटू में विशाल मेला लगता है, तब भक्त इस भजन को गाकर अपनी यात्रा की खुशी और बाबा के प्रति अपना प्रेम प्रकट करते हैं। इसे गाने से मन में उत्साह और भक्ति का संचार होता है। भक्त इसे यात्रा के दौरान, पदयात्रा करते समय या श्याम बाबा के दरबार में पहुँचने की खुशी में गाते हैं, ताकि वे बाबा का आशीर्वाद पा सकें और उनके चरणों में शीश नवाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण कर सकें।

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