Khatu Shyam

Babo Shyam Dhani Bhagta Ko Bedo Paar Karailo

बाबो श्याम धणी भगतां को बेड़ो पार करैलो रै बाबो

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बाबो श्याम धणी भगतां को बेड़ो पार करैलो रै बाबो ॥ टेक ॥ श्याम धणी दातार दया कर सबका संकट काटै रै भीड़ पड़यां भोळा भक्तां पर ध्यान धरैलो रै बाबो ॥1॥ सांचा मन सूं सुमस्यां बाबो करै न पळ की देरी रै दुख दारिद्र दूर भगा भण्डार भरैलो रै बाबो ॥2॥ बाबो लखदातार भगत पर नजर महर की नांखै रै मिन्टां में त्रिताप पाप-संताप हरैलो रै बाबो ॥3॥ ई कळजुग में श्याम धणी सूं देव न दूजो मोटो रै कर मन में पतियारो सारो काज सरैलो रै बाबो ॥4॥ कर मन में विश्वास आस कर शरण श्याम की पड़जा रै बीच भंवर में अटक्यो बेड़ो पार तिरैलो रै बाबो ॥5॥

इस भजन के बारे में

यह भजन कलयुग के अवतारी देव, खाटू श्याम बाबा को समर्पित है। इस भजन का भाव यह है कि बाबा श्याम अपने भक्तों के सबसे बड़े रक्षक और सहायक हैं। जिस प्रकार नाविक नाव को मझधार से पार लगाता है, उसी प्रकार बाबा श्याम अपने भक्तों के जीवन की कठिन परिस्थितियों और दुखों को दूर कर उन्हें भवसागर से पार उतार देते हैं। वे 'लखदातार' हैं, जो सच्चे मन से पुकारने पर बिना किसी देरी के अपने भक्त की सहायता के लिए दौड़े चले आते हैं।

भक्त इस भजन को तब गाते हैं जब वे जीवन में निराशा या संकट महसूस करते हैं। इसे गाने का मुख्य उद्देश्य मन में अटूट विश्वास जगाना है कि श्याम बाबा सदैव हमारे साथ हैं। यह भजन हमें याद दिलाता है कि यदि हम पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ बाबा की शरण में चले जाएं, तो वे हमारे सभी कष्टों को हर लेते हैं और हमारे जीवन के भंडार खुशियों से भर देते हैं। इसे सुनने या गाने से मन को असीम शांति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है कि बाबा श्याम के रहते कोई भी कार्य अधूरा नहीं रह सकता।

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