Khatu Shyam

Baba Shyam Dhani Datar

बाबा श्याम धणी दातार

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बाबा श्याम धणी दातार भगत को सुणज्यो हेलो रै बाबा ॥ टेक ॥ तीन बाण का बळ सूं बाबो तिरलोकी बस करली रै द्वापर युग में जनम्यों जबरो जोध अकेलो रै बाबा ॥1॥ महाभारत को जंग छिड़च्यो जद श्री कृष्ण सिर मांग्यो रै तुरत दे दियो दान शीश दानी अलबेलो रै बाबा ॥2॥ श्री कृष्ण खुश होय दियो वर कळजुग मांय पुजासी रै धोकैला नर-नार भरैलो लक्खी मेळो रै बाबा ॥3॥ बर्बरीक भगवान कृष्ण का श्याम नाम सूं पुजग्या रै खाटू मन्दिर मिनख मोकळो होवै भेळो रै बाबा ॥4॥ खाटू लख दातार धणी अब आस घणी छै थारी रै नाव भंवर कै बीच दया कर दीजै पेलो रै बाबा ॥5॥

इस भजन के बारे में

यह भजन खाटू श्याम जी, जिन्हें बर्बरीक के नाम से भी जाना जाता है, की महिमा को समर्पित है। इस भजन का भावार्थ यह है कि बाबा श्याम अत्यंत दयालु और दानी हैं, जो अपने भक्तों की पुकार सुनकर उनकी हर बाधा को दूर करते हैं। इसमें उनके तीन बाणों के बल और महाभारत के युद्ध में भगवान कृष्ण को अपना शीश दान करने की महान त्याग गाथा का वर्णन है। भगवान कृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें कलियुग में अपने नाम 'श्याम' से पूजे जाने का वरदान दिया था, इसीलिए आज खाटू धाम में भक्तों का सैलाब उमड़ता है। भक्त इस भजन को अपनी कठिन परिस्थितियों में गाते हैं, जब उन्हें जीवन की नैया पार लगाने के लिए बाबा की कृपा की आवश्यकता होती है। इसे गाने से मन को असीम शांति मिलती है और विश्वास जागृत होता है कि खाटू नरेश अपने भक्तों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर हैं। यह भजन विशेष रूप से खाटू श्याम जी के प्रति अटूट श्रद्धा और समर्पण व्यक्त करने के लिए गाया जाता है।

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