
संकटनाशन गणेश स्तोत्र की कथा
Sankatnashan Ganesh Stotra Ki Katha
श्रीगणेश की स्तुति में रचे गए अनेक स्तोत्रों में "संकटनाशन गणेश स्तोत्र" का विशेष स्थान है। यह स्तोत्र नारद पुराण में वर्णित है और स्वयं देवर्षि नारद द्वारा रचित माना जाता है। इसका नाम ही इसकी महिमा प्रकट करता है — "संकटनाशन" अर्थात संकटों का नाश करने वाला। जो भक्त श्रद्धा से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके जीवन के समस्त संकट और विघ्न दूर हो जाते हैं।
इस स्तोत्र की उत्पत्ति की कथा देवर्षि नारद से जुड़ी है। कहा जाता है कि नारद जी तीनों लोकों में भ्रमण करते हुए अनेक जीवों को संकट और दुःख में घिरा देखते थे। उनका करुणामय हृदय द्रवित हो उठता था। वे चाहते थे कि साधारण मनुष्य को भी कोई ऐसा सरल साधन मिले जिससे वह अपने कष्टों से मुक्ति पा सके और गणपति की कृपा प्राप्त कर सके।
इसी भाव से प्रेरित होकर देवर्षि नारद ने विघ्नहर्ता गणेश की स्तुति में इस स्तोत्र की रचना की। इसमें गणपति के बारह पवित्र नामों का स्मरण किया गया है — वक्रतुण्ड, एकदन्त, कृष्णपिंगाक्ष, गजवक्त्र, लम्बोदर, विकट, विघ्नराज, धूम्रवर्ण, भालचन्द्र, विनायक, गणपति और गजानन। इन बारह नामों में गणेशजी के समस्त स्वरूपों और गुणों का सार समाया हुआ है।
नारद जी ने स्तोत्र के अन्त में इसका फल भी बताया। उन्होंने कहा कि जो भक्त तीनों समय — प्रातः, मध्याह्न और सायं — इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे किसी भी प्रकार के विघ्न का भय नहीं रहता। जो विद्यार्थी इसका पाठ करता है उसे विद्या प्राप्त होती है, धन चाहने वाले को धन, पुत्र की कामना वाले को पुत्र और मोक्ष चाहने वाले को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
इस स्तोत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता है। इसे बिना किसी जटिल विधि के, केवल शुद्ध हृदय और श्रद्धा के साथ पढ़ा जा सकता है। यही कारण है कि यह स्तोत्र घर-घर में लोकप्रिय है। बुधवार का दिन तथा चतुर्थी तिथि इसके पाठ के लिए विशेष शुभ माने जाते हैं, और इक्कीस बार पाठ करने से इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
अनेक भक्तों का अनुभव है कि जब जीवन में कोई गहरा संकट आता है, न्यायालय के विवाद, रोग, भय अथवा बाधाएँ घेर लेती हैं, तब इस स्तोत्र का नियमित पाठ अद्भुत रूप से मार्ग प्रशस्त कर देता है। मन में शान्ति उतरती है और परिस्थितियाँ स्वयं अनुकूल होने लगती हैं।
संकटनाशन गणेश स्तोत्र की महिमा अवर्णनीय है — जिस भक्त की जिह्वा पर गणपति के ये बारह पावन नाम बसते हैं, उसके जीवन में संकट का साम्राज्य ठहर ही नहीं पाता, और विघ्नहर्ता की कृपा सदा उसके साथ रहती है।