Angarki Chaturthi Ki Katha - Mangal Grah Aur Ganesh

अंगारकी चतुर्थी की कथा — मंगल ग्रह और गणेश

Angarki Chaturthi Ki Katha - Mangal Grah Aur Ganesh

जब संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है, तो उसे "अंगारकी चतुर्थी" कहा जाता है। "अंगारक" मंगल ग्रह का ही एक नाम है, जिसका वर्ण अंगारे के समान लाल है। यह चतुर्थी अत्यन्त दुर्लभ और फलदायी मानी जाती है, क्योंकि कहा जाता है कि एक अंगारकी चतुर्थी का व्रत करने से वर्षभर की संकष्टी चतुर्थियों के समान पुण्य प्राप्त होता है।

इस चतुर्थी के पीछे की कथा मंगल ग्रह की उत्पत्ति और गणेशजी की कृपा से जुड़ी है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव के पसीने की एक बूँद पृथ्वी पर गिरी, जिससे एक तेजस्वी बालक का जन्म हुआ, जिसका वर्ण अंगारे के समान लाल था। धरती माता ने उसका पालन-पोषण किया, इसलिए वह "भौम" कहलाया। यही बालक आगे चलकर मंगल ग्रह बना।

बड़ा होने पर भौम के मन में यह इच्छा जागी कि वह ग्रहों में स्थान पाए और सदा पूजनीय बने। इसके लिए उसने अवन्ती नगरी में जाकर घोर तपस्या आरम्भ की। वर्षों तक उसने कठोर साधना की, अन्न-जल त्यागकर केवल श्रीगणेश का ध्यान किया। उसकी अटूट श्रद्धा और तपस्या से विघ्नहर्ता गणपति प्रसन्न हुए।

एक मंगलवार को, जो चतुर्थी तिथि थी, श्रीगणेश ने भौम को दर्शन दिए। गजानन ने कहा — "हे भौम! तुम्हारी तपस्या से मैं अत्यन्त प्रसन्न हूँ। तुम्हें आकाश में ग्रह का स्थान प्राप्त होगा और तुम मंगल के नाम से पूजे जाओगे। और आज जिस तिथि पर मैंने तुम्हें दर्शन दिए, वह मंगलवार की चतुर्थी सदा 'अंगारकी चतुर्थी' के नाम से प्रसिद्ध होगी। जो भी इस दिन मेरा व्रत करेगा, उसके सभी विघ्न नष्ट होंगे।"

इस प्रकार गणेशजी के वरदान से भौम को मंगल ग्रह का पद प्राप्त हुआ और अंगारकी चतुर्थी की महिमा तीनों लोकों में फैल गई। इसी कारण जिन जातकों की कुण्डली में मंगल दोष होता है, वे भी इस दिन गणपति की आराधना कर मंगल की शान्ति और शुभता की प्रार्थना करते हैं।

इस दिन की व्रत विधि संकष्टी चतुर्थी के समान ही है। भक्त उपवास रखते हैं, लाल पुष्प, सिन्दूर, दूर्वा और मोदक अर्पित करते हैं तथा चन्द्रोदय पर अर्घ्य देकर पारण करते हैं। लाल रंग की वस्तुओं का दान और मंगल-गणेश दोनों का स्मरण इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

अंगारकी चतुर्थी की महिमा अपार है — जिस भक्त पर गणपति और मंगल दोनों की कृपा हो, उसके जीवन से भय, ऋण और विघ्न सदा के लिए मिट जाते हैं और सौभाग्य के अंगारे उसके आँगन को आलोकित कर देते हैं।

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