Triloki Ro Nath Jaat Ghar
त्रिलोकी रो नाथ जाट घर
Loading…
✍️ रचयिता: सोहनलाल लौहाकर
इस भजन के बारे में
यह भजन भगवान श्री कृष्ण (लीला श्याम) की अद्भुत भक्त-वत्सलता को दर्शाता है। इसमें बताया गया है कि कैसे तीनों लोकों के स्वामी स्वयं एक साधारण किसान (जाट) के घर 'हाळी' यानी खेत में काम करने वाले सहायक बन गए हैं। यह भजन इस भाव को प्रकट करता है कि जब भक्त पूरी तरह से प्रभु पर निर्भर हो जाता है, तो भगवान स्वयं उसके जीवन की बागडोर संभाल लेते हैं और उसकी रक्षा के लिए पहरेदार बन जाते हैं।
इस भजन में एक ऐसे भक्त की निष्ठा का वर्णन है जो राम भरोसे खेती करता है और प्रभु उसकी फसल की रखवाली करते हैं। यहाँ भगवान का सादगी भरा रूप दिखाया गया है, जो भक्त के साथ बैठकर बाजरे की रोटी, छाछ और राबड़ी का आनंद लेते हैं। भक्त इस भजन को तब गाते हैं जब वे प्रभु के प्रति अपना अटूट विश्वास जताना चाहते हैं। इसे गाने से मन में यह भाव जागृत होता है कि यदि हम सच्चे मन से प्रभु को पुकारें, तो वे हमारे हर छोटे-बड़े काम में हमारे साथ खड़े रहते हैं और हमें किसी भी संकट से बचा लेते हैं।
क्या ठीक नहीं है? चुनें — admin जल्दी सुधार देगा।