Gayan Wala Kanji Re
गायां वाला कानजी रे
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गायां वाला कानजी रे थारी
गायां ने पाछी घेर, कुए पर एकली रे ॥ टेक ॥
चरती गायां ना मुड़े, ना मुड़े रे गुजरी
घूंघट का पट खोल, कुए पर एकली रे ॥1॥
सुसरो म्हारो चौधरी रे कानूड़ा
सासु बड़ी है हुशियार, कुए पर एकली रे ॥2॥
आभा चमके बीजली रे कानूड़ा
बरसें है मूसलधार, कुए पर एकली रे ॥3॥
बागां बोले कोयली रे कानूड़ा
बन में दादुर मोर, कुए पर एकली रे ॥4॥
चन्द्र सखी री वीनति रे कानूड़ा
भवजल पार उतार, कुए पर एकली रे ॥5॥
✍️ रचयिता: चन्द्र सखी
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