Krishna

Aisi Lagi Lagan (Anup Jalota)

ऐसी लागी लगन

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ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन। वो तो गली गली हरि गुण गाने लगी॥ महलों में पली, बन के जोगन चली। मीरा रानी दीवानी कहाने लगी॥ राणा ने विष दिया, मानो अमृत पिया। मीरा सागर में सरिता समाने लगी॥ दुःख लाखों सहे, मुख से गोविन्द कहे। मीरा गोविन्द गोपाल गाने लगी॥ बैर करे जग सारा, पर छूटे ना प्यारा। मीरा प्रीत पुरानी निभाने लगी॥

इस भजन के बारे में

यह भजन कृष्ण भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाने वाली संत मीराबाई के जीवन पर आधारित है। इसका भावार्थ यह है कि जब भक्त का मन पूरी तरह से ईश्वर के प्रेम में डूब जाता है, तो उसे संसार की कोई भी बाधा विचलित नहीं कर सकती। मीराबाई ने महलों के सुख त्यागकर जिस तरह कृष्ण के प्रति अपनी अनन्य भक्ति दिखाई, वह हमें सिखाती है कि सच्चा प्रेम सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर केवल प्रभु के चरणों में समर्पित होना है।

इस भजन में मीराबाई के अटूट विश्वास का वर्णन है, जिन्होंने विष के प्याले को भी कृष्ण का प्रसाद समझकर पी लिया था। भक्त इसे तब गाते हैं जब वे अपने मन में प्रभु के प्रति समर्पण और एकाग्रता का अनुभव करना चाहते हैं। यह भजन कठिन समय में धैर्य रखने और संसार की परवाह किए बिना केवल गोविंद के गुणगान में लीन रहने की प्रेरणा देता है। इसे सुनने या गाने से मन में शांति और भक्ति का संचार होता है, जिससे भक्त को अपने आराध्य के साथ एक गहरा जुड़ाव महसूस होता है।

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