Thali Bharne Lai Re Khivado
थाली भरने लाई रे खिवड़ो
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थाली भरने लाई रे खिवड़ो ऊपर घी की बाटकी।
जीमो मारा श्याम धणी जिमावे बेटी जाटकी ॥ टेक ॥
दादो मारो गयो रे गावड़ ना जाने कद आवेलो।
बिके भरोसे बैठो रयोतो भूखांहिं मर जावेलो।
आज जिमाऊ थने रे खिवड़ो, काल राबड़ी छाछ की ॥1॥
बार बार मन्दिर ने जुड़ती बार बार पट खोलती।
कड़ैया कोनी जिमें मोहन कड़ड़ी कड़ड़ी बोलती।
थे जिमो जद में भी जिमु मानु नाहिं लाठखी ॥2॥
पड़तो भूल गई रे सांवरियां, पड़तो फेर लगायो है।
थावल्या रे ओटे बैठ ने श्याम खिवड़ो खायो।
भोला भाला भक्ता सूं था रख्यो कोनी आंचकी ॥3॥
भक्तिं हो तो करमा जैसी सांवरियों घर आवेलो।
साहनलाल लुहाकर श्याम धौरा हरष हरष गुण गावेलो।
साँचो प्रेम प्रभु से हो तो मृण बालो काठ की ॥4॥
✍️ रचयिता: साहनलाल लुहाकर
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