Krishna

Shyam Virah

न जाने सखी, श्याम किधर खो गये

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यहीं चलाएँ · Play here
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न जाने सखी, श्याम किधर खो गये बंशी की आवाज, गम के आँसू दे गये खो गया है मेरा तो श्याम सखियो ढूँढो, खोजो, पाओ, देखो श्याम सखियो मेरा श्याम सखियो ॥ टेक ॥ आने की कह गये मेरे साँवरिया, उनके बिन मेरी सूनी अटरियाँ राहों में उनके फूल बिछाऊँ, दिल के अँगना में घर मैं बनाऊँ उनके बिन, मेरा मन सूना है, यह दर्पण ॥1॥ नस-नस में मेरे टपके पसीना, अंग सारे कुम्लाये मन्द भई नाड़ी की गति पर, श्याम नज़र नहीं आये सूना सूना है मधुबन, रूखा रूखा है जीवन ॥2॥ अब तो दरस दिखा दे साँवरिया, बिन तेरे मर जायेगी गुजरियां आशा 'मनोज' श्याम पुकारे, नृसिंह मण्डल तेरे सहारे मेरे श्याम, अब तो आजा, मेरे दिल को, धीर बँधाजा ॥3॥

✍️ रचयिता: मनोज

इस भजन के बारे में

यह भजन राधा रानी और गोपियों की उस व्याकुलता को दर्शाता है जो भगवान श्रीकृष्ण के विरह में उत्पन्न होती है। इसमें भक्त अपने मन की पीड़ा को सखियों के साथ साझा कर रहा है, जहाँ श्याम की बंसी की मधुर यादें अब केवल आंसुओं का कारण बन गई हैं। यह भाव दर्शाता है कि जब प्रभु का सानिध्य दूर हो जाता है, तो भक्त का जीवन और मन पूरी तरह सूना और नीरस हो जाता है।

यह भजन मुख्य रूप से श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। भक्त इस भजन को तब गाते हैं जब वे स्वयं को ईश्वर से दूर महसूस करते हैं और उनके दर्शन के लिए तड़प रहे होते हैं। इसे गाने से मन में प्रभु के प्रति प्रेम और गहरा होता है और भक्त को अपनी साधना में धैर्य रखने की प्रेरणा मिलती है। यह भजन विशेष रूप से उन अवसरों पर गाया जाता है जब भक्त पूर्ण समर्पण के साथ अपने आराध्य को पुकारना चाहता है।

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