Krishna

Shyam Ki Yaad

श्याम की याद

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जिन्दगी जब तक रहेगी, छोड़ूं ना तेरे नाम को। बन्दगी इक तुमसे श्याम मेरी कैसे छोड़ूं तेरे धाम को॥ दोहा दुनियाँ विरानी लगती है, सूना सूना लगता है, तेरे बिन हो कान्हा, तुमने यह कैसा जादू किया है, यादें तेरी आये हर पल, पल पल ॥ टेक ॥ निंदियां मेरी तूने चुरायी, चैन मेरा तूने चुराया। सपने में तेरे दर्शन पाऊँ, तेरी मूरत कैसे भुलाऊँ॥ वंशी वाले, नैनों के तारे, मेरा दिल बस तुझको पुकारे... दुनियाँ विरानी.... ॥1॥ मेरे दिल में तेरी आशा, झोली भरोगे पूरा भरोसा। 'मनोज' तेरी राह निहारे, मेरा जीवन तेरे सहारे॥ साँसों का बन्धन, टूट ना जाये, नृसिंह मण्डल तुझको पुकारे... दुनियाँ विरानी... ॥2॥

✍️ रचयिता: मनोज

इस भजन के बारे में

यह भजन "श्याम की याद" भगवान श्री कृष्ण के प्रति एक भक्त के अनन्य प्रेम और विरह-भाव को दर्शाता है। इसमें भक्त अपने आराध्य श्यामसुंदर के बिना अपने जीवन को सूना और अधूरा महसूस करता है। यह भजन बताता है कि कैसे श्याम का नाम और उनकी यादें भक्त के जीवन में हर पल व्याप्त रहती हैं, यहाँ तक कि उनकी नींद और चैन भी श्याम ने चुरा लिया है।

यह भजन विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है, जिन्हें "श्याम", "कान्हा", "बंसी वाले" और "नैनों के तारे" जैसे प्यारे नामों से पुकारा गया है। यह उनकी मनमोहक छवि और भक्त के हृदय पर उनके गहरे प्रभाव को उजागर करता है। भक्त को पूरा विश्वास है कि श्याम उसकी आशाओं को पूर्ण करेंगे और उसकी झोली भरेंगे।

भक्त इस भजन को अक्सर एकांत में, जब वह अपने आराध्य की याद में लीन होता है, तब गाता है। यह भजन विरह की उस मीठी पीड़ा को व्यक्त करता है जो भक्त को भगवान के और करीब लाती है। इसे गाने से भक्त को अपने इष्ट से जुड़ाव महसूस होता है, मन को शांति मिलती है और यह विश्वास दृढ़ होता है कि भगवान हमेशा उसके साथ हैं। यह भजन प्रेम, विश्वास और समर्पण का एक सुंदर संगम है।

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