Krishna

Rut Aayi Bolat Moran Ri

रुत आई बोलत मोरां री

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घोर घुमट कर बादळ गरजे, घोर घुमट कर बादळ गरजे। इन्द्र करे रमडोळा रे, इन्द्र करे रमडोळा रे। इन्द्र करे रमडोळा रे, रुत आई बोलत मोरां री। रुत आई बोलत मोरां री ॥ टेक ॥ दादर मोर पपीहा बोले, दादर मोर पपीहा बोले। कोयल करे किलकारी रे, कोयल करे किलकारी रे। कोयल करे किलकारी रे, रुत आई बोलत मोरां री। रुत आई बोलत मोरां री ॥1॥ सावण बरसे भादवो बरसे, सावण बरसे भादवो बरसे। चोवण लागा मोइला ओरा रे, चोवण लागा मोइला ओरा रे। चोवण लागा मोइला ओरा रे, रुत आई बोलत मोरां री। रुत आई बोलत मोरां री ॥2॥ बोले मीरां बाई गिरधर नागर, बोले मीरां बाई गिरधर नागर। चरण कमल चित चोरा रे, चरण कमल चित चोरा रे। चरण कमल चित चोरा रे, रुत आई बोलत मोरां री। रुत आई बोलत मोरां री ॥3॥

✍️ रचयिता: मीरां बाई

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