Bheru Ji

Ringas Ka Bheru Ladla

रिंगस का भैरू लाडला

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माताजी की पेड्यां माई कंवर केसरियो रह छ, मैलां माई भैरू बमडो बच्यो फिर छ, हेला पर आजा रे, रिंगस का भैरू लाडला रे ॥ टेक ॥ मालियां की छोरी थाने गजरो भेंट कर छ, गजरा पर आजा रे, रिंगस का भैरू लाडला रे ॥1॥ कलाली की छोरी थाने बोतल भेंट कर छ, बोतल पर आजा रे, रिंगस का भैरू लाडला रे ॥2॥ गुजर की छोरी थाने बकरो भेंट कर छ, बकरा पर आजा रे, रिंगस का भैरू लाडला रे ॥3॥ कुम्हारियां की छोरी थाने कलशयो भेंट कर छ, कलशयो पर आजा रे, रिंगस का भैरू लाडला रे ॥4॥

इस भजन के बारे में

यह भजन राजस्थान के प्रसिद्ध लोक देवता 'रिंगस के भैरू बाबा' को समर्पित है, जिन्हें भक्त अत्यंत प्रेम से अपना लाडला मानते हैं। इस भजन का भाव यह है कि भक्त अपने आराध्य को बुलाने के लिए विभिन्न प्रकार की भेंट अर्पित करते हैं। यहाँ 'रिंगस का भैरू लाडला' पुकार का अर्थ है कि भक्त का विश्वास है कि उनके बुलाने पर भैरू बाबा अवश्य दौड़े चले आएंगे। यह भजन बाबा के प्रति अटूट श्रद्धा और उनके साथ एक आत्मीय संबंध को दर्शाता है, जहाँ भक्त उन्हें अपने परिवार के सदस्य की तरह पुकारते हैं।

भक्त इस भजन को मुख्य रूप से खाटू श्याम जी की यात्रा के दौरान या भैरू बाबा के मंदिरों में आयोजित जागरणों में गाते हैं। इसे गाने का उद्देश्य बाबा को प्रसन्न करना और उनसे अपनी रक्षा व कृपा की कामना करना है। इस भजन को गाते समय मन में एक उत्साह और आनंद का भाव होता है, जो भक्तों को बाबा की भक्ति में सराबोर कर देता है। यह भजन हमें सिखाता है कि ईश्वर के साथ हमारा रिश्ता प्रेम और विश्वास का होना चाहिए, जहाँ हम अपनी सरल भावनाओं के साथ उन्हें कभी भी पुकार सकते हैं।

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