Bheru Ji

Ma Janugi Bheruda Thari Maya

म जाणगी भेरूड़ा थारी माया

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यहीं चलाएँ · Play here
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म जाणगी भेरूड़ा थारी माया न तू बेटा देरयो बाँझड़ी लुगाया न ॥ टेक ॥ खाया पिया बिना तने निंद नहीं आवे बारह मण का बांकला तू एकलो गटकावे खागो पुआ की भरी कढ़ाया न, बेटा देरयो ॥1॥ करयोड़ी करतूत थारी म्हारे स ना छानी ले रयो छ र मोजा भैरू बागा को सैलानी इत्तर केवड़ों महाकादि थारी काया न, बेटा देरयो ॥2॥ चमेली का तेल म तू जटा न झकोलगो आतो जातो माथों बि जयचन्द को पपोलगो नित चाटरयो माल पराया न, बेटा देरयो ॥3॥ काई कि नाराजी आगी, बोल किया रूसगो फूल रयो मुन्डो थारो थोबड़ो क्यों सुजगो कोई पायो नहीं पाणी तिसाया न, बेटा देरयो ॥4॥ मान गो म मान भैरू जबरो छ बैनाड़ को मेट दियो दर्द, मालीराम कि नाड़ को बाबो दे दिन्यो मात कसाया न, बेटा देरयो ॥5॥

✍️ रचयिता: मालीराम

इस भजन के बारे में

यह भजन लोक देवता भैरूनाथ जी की महिमा और उनके प्रति भक्त के अनन्य प्रेम को समर्पित है। इस भजन में भक्त भैरू जी की माया और उनकी लीलाओं का वर्णन करते हुए कहता है कि वह उनकी शक्ति को भली-भांति जान गया है। यहाँ भक्त भैरू जी को एक बालक के समान मानकर उनसे लाड़-प्यार और शिकायत दोनों कर रहा है। यह रचना भैरू जी के प्रति उस अटूट विश्वास को दर्शाती है जहाँ भक्त अपने आराध्य से रूठने और मनाने का अधिकार रखता है।

भक्त इस भजन के माध्यम से भैरू जी को अपनी पीड़ा सुनाते हैं और उनसे कृपा की याचना करते हैं। इसमें भैरू जी के स्वरूप, उनकी पसंद और उनके द्वारा भक्तों के कष्टों को दूर करने का भाव है। यह भजन विशेष रूप से राजस्थान के लोक उत्सवों, भैरू जी के मंदिरों में जागरण के दौरान और संकट के समय गाया जाता है। इसे गाने से मन में सकारात्मकता आती है और भक्तों को यह विश्वास मिलता है कि भैरूनाथ उनके दुखों को हरकर उन्हें सुख और संतान का आशीर्वाद प्रदान करेंगे।

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