Nakharo Gujariya Ko Nyaro
नखरो गुजरया को न्यारो र न्यारो
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इस भजन के बारे में
यह भजन बरसाना की लाड़ली श्री राधा रानी और उनकी सखियों के अलौकिक प्रेम और उनके नखरों का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि कैसे राधा रानी और गोपियों के भोले-भाले नखरों पर स्वयं सांवरे सरकार यानी श्री कृष्ण मुग्ध हो जाते हैं। यह भजन दर्शाता है कि भक्त का प्रेम और उसका भाव जब निश्छल होता है, तो भगवान स्वयं भक्त के इशारों पर नाचने को मजबूर हो जाते हैं।
यह भजन मुख्य रूप से श्री राधा-कृष्ण की मधुर लीलाओं को समर्पित है। भक्त इसे विशेष रूप से होली, जन्माष्टमी या संकीर्तन के दौरान गाते हैं। इसे गाने का उद्देश्य मन में राधा-कृष्ण के प्रति प्रेम और आनंद का भाव जगाना है। जब भक्त इस भजन को गाते हैं, तो वे स्वयं को बरसाना की गलियों में महसूस करते हैं, जहाँ कान्हा अपनी प्रिय राधा के नखरों पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। इसे सुनने और गाने से मन में भक्ति का रस भर जाता है और भक्त को मानसिक शांति व आनंद की प्राप्ति होती है।
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