Nirgun / Satsang

Mhara Hariya Ban Ra Suvatiya

म्हारा हरिया बन रा सुवटिया

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म्हारा हरिया बन रा सुवटिया, तने राम मिले तो कहिजे रे, राम मिले तो कहिजे रे, घनश्याम मिले तो कहिजे रे, म्हारा हरिया बन रा सुवटिया, तने राम मिले तो कहिजे रे ॥ टेक ॥ पांच तत्व का बगिया पिंजरा, ज्यामे बैठयो रिज्ये रे, यो पिंजरों अब भयो पुराणों, नित नई खबरां दिज्ये रे, म्हारा हरिया बन रा सुवटिया, तने राम मिले तो कहिजे रे ॥1॥ इस पिंजरे के दस दरवाजा, आतो जातो रहिजे रे, अरे रामनाम की भरले नोका, नित भजना में रहिज्ये रे, म्हारा हरिया बन रा सुवटिया, तने राम मिले तो कहिजे रे ॥2॥

✍️ रचयिता: पारंपरिक

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